Friday, July 07, 2006

मैं होश में था

मैं होश में था तो फिर उसपे मर गया कैसे
ये जहर मेरे लहू में उतर गया कैसे

कुछ उसके दिल में लगावट जरूर थी वरना
वो मेरा हाथ दबाकर गुजर गया कैसे

जरूर उसके तसव्वुर की राहत होगी
नशे में था तो मैं अपने ही घर गया कैसे

जिसे भुलाये कई साल हो गये कलीम
मैं आज उसकी गली से गुजर गया कैसे

कलीम कंधपुरी

1 comments:

ACHARAJI said...

thanks kailash ji
your's gajal "Me hosh me th..." aare very classic gajal I hope to post any ralated gajals.

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