Showing posts with label बेवफ़ाई. Show all posts
Showing posts with label बेवफ़ाई. Show all posts

हम उन्हें वो हमें भुला बैठे


हम उन्हें वो हमें भुला बैठे
दो गुनहगार ज़हर खा बैठे|

हाल--ग़म कह-कह के ग़म बढ़ा बैठे
तीर मारे थे तीर खा बैठे|

आंधियो जाओ अब आराम करो
हम ख़ुद अपना दिया बुझा बैठे|

जी तो हल्का हुआ मगर यारो
रो के हम लुत्फ़--गम बढ़ा बैठे|

बेसहारों का हौसला ही क्या
घर में घबराए दर पे बैठे|

जब से बिछड़े वो मुस्कुराए हम
सब ने छेड़ा तो लब हिला बैठे|

उठ के इक बेवफ़ा ने दे दी जान
रह गए सारे बावफ़ा बैठे|

हश्र का दिन है अभी दूर 'ख़ुमार'
आप क्यों जाहिदों में जा बैठे|

ख़ुमार बाराबंकवी
Enhanced by Zemanta